Author: admin

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बिहार में पाला-बदल के निहितार्थ

– अशोक भारत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को इस्तीफा दे कर  राज्य में महागठबंधन की सरकार का अंत कर दिया।  24 घंटे के अंदर ही भाजपा के साथ मिलकर  छठी...

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आजादी : सपने और हकीकत

लम्बे संघर्ष और कुर्बानियों के बाद देश आजाद हुआ। आजादी मिले  सत्तर साल हो रहे हैं । आजादी का हमारा सपना क्या था?  हमारे राष्ट्रनिर्माता किस प्रकार का राष्ट्र बनाना चाहते थे? भगत सिंह...

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सौ साल पहले चम्पारण का गांधी

चम्पारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष में प्रकाशित महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं संग्रहणीय उपन्यास ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों पर उपन्यास लेखन रचनाकारों के लिए हमेशा आकर्षण का केन्द्र रहा है। साथ ही ऐतिहासिक घटनाओं एवं पात्रों...

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गंगा : एक आैर भगीरथ की तलाश है

– अशोक भारत करोड़ो लोगों के धार्मिक आस्था और विश्वास का केन्द्र तथा आजिविका का आधार जीवनदायिनी गंगा आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष  कर रही है। सभ्यता के विकास में नदियों का महत्वपूर्ण...

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चंपारण में चार दिन

– अशोक भारत   सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष में चंपारण में कार्यक्रमों की बाढ़ सी आ गयी है. बिहार सरकार ने बड़े पैमाने पर राज्य में कार्यक्रमों का एलान किया है .इसे अमलीजामा पहनने...

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सरकार के नहीं समाज के नियंत्रण में हो पानी

देश इस समय भीषण जल संकट से जूझ रहा है. आज़ादी के बाद का यह सबसे गंभीर स्थिति है. संसद से सड़क तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है. देशभर के अनेक जन संगठनो...

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चला गया आदिवासियों का मसीहा

भारत जन आन्दोलन के अध्यक्ष,अनुसूचित जाति जन जाति आयोग के पूर्व आयुक्त एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ बी.डी.शर्मा का देहांत 6 दिसंबर को ग्वालियर में हो गया.वे 85 वर्ष के थे. डॉ. बी. डी....

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बिहार जनादेश के निहितार्थ

बिहार की जनता ने चुनाव पूर्व अनुमानों, राजनीतिक विश्लेषकों तथा एग्जिट पोल के नतीजों से उलट महागठबंधन को दो तिहाई से अधिक सीट दे कर नीतीश कुमार की सत्ता बरक़रार रखी है. इस जनादेश...

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युवा संवाद अभियान – पानीपत कार्यशाला की रिपोर्ट

युवा संवाद अभियान की कार्यशाला 12 -13 अगस्त 2015 को निर्मला देशपांडे शिक्षण संसथान, पानीपत में उत्साहजनक माहौल में अगले पांच वर्षों में संवाद कर युवा –शक्ति को नयी विश्व व्यवस्था के निर्माण में...

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राष्ट्र-निर्माण और युवा

— अशोक भारत आजादी प्राप्त हुए सात दशक हो रहे हैं। इन बीते वर्षों में विकास के नाम पर बड़े-बड़े नगर-महानगर खड़े किये गये। ‘एक्सप्रेस’ वे बना, सड़वेंâ चौड़ी हुर्इं। विशाल कल-कारखाने, बांध बनाये...