Monthly Archive: July 2015

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राष्ट्र-निर्माण और युवा

— अशोक भारत आजादी प्राप्त हुए सात दशक हो रहे हैं। इन बीते वर्षों में विकास के नाम पर बड़े-बड़े नगर-महानगर खड़े किये गये। ‘एक्सप्रेस’ वे बना, सड़वेंâ चौड़ी हुर्इं। विशाल कल-कारखाने, बांध बनाये...

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आज की चुनौती एवं युवा

हर समाज के सामने कोई सवाल होता है और उसे वह अपने स्तर से हल करने की कोशिश करता है। विज्ञान के इस युग में मनुष्य ने भौतिक उपलब्धियां तो बहुत हासिल कीं, सुख-सुविधा...

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बदलाव की मृग मरीचिका से आगे

लोकतंत्र का महापर्व चुनाव बिहार में दस्तक दे रहा है। इसलिए राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। राजनीतिक दल सक्रिय हो गये हैं। चुनाव जीतने के लिए एक तरफ राजद, जद (यू)...

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औद्योगिक सभ्यता और राष्ट्र-राज्य

— अशोक भारत पूंजीवाद ने उन देशों में जहां इसका शुरू-शुरू में विकास हुआ था, राष्ट्र-राज्य को जोड़ने में सीमेंट का काम किया। हालांकि आधारभूत रूप से राष्ट्र-राज्य कबायली भावना पर आधारित था, जहां...